Tuesday, 18 November 2014

जू की टाइग्रेस को गोद लिया

''हो सकता है कुछ दोस्त ये  नहीं जानते हो की जू के वन्यजीवों को भी गोद लिया जा सकता है, छतीसगढ़ ले बिलासपुर जिले के कानन पेंडारी जू की टाइग्रेस 'आशा' को यहाँ के डा,मनीष बुधिया और डा.रश्मि बुधिया के अपने पुत्र श्रेयांश के जन्मदिन पर गोद लिया,जिसमें उन्होंने 1 लाख 80 हजार का चेक उनके एक साल के खाने और रख्राव के लिए वन विभाग के सौंप दिया है.वन्यजीवों से प्यार रखने वाले इस परिवार ने वहां सुपुत्र का जन्मदिन भी मनाया,डीऍफ़ओ सत्यप्रकाश मसीह ने उन्हें गोद्नामें से सम्बन्धित प्रमाण दिया है ,,!!
इसके पहले छतीसगढ़ हाईकोर्ट ले तत्कालीन चीफ जस्टिस यतीन्द्र सिंह ने भी इस जू के वन्य जीव को गोद ले चुके हैं ,,! ये योजना जीवों से जुड़ाव बढ़ाने के लिए राज्य में चलायी जा रही है ,,,!

Friday, 10 October 2014

मवेशी की घंटी बाघ के लिए जानलेवा


ये सत्य है पर निवेदन ही ये बात ज्ञान के लिए है शिकार के लिए नहीं ,,,!
छतीसगढ़ ही नहीं और भी कई जगह होगी जहाँ तंग करने वाले या आदतन झुण्ड दे भाग जाने वाले मवेशी के गले में लकड़ी की बड़ी सी घंटी बांध दी जाती है,जब वो चलता है तो इसकी खड़-खड़ की ध्वनि दूर तक सुनाई देती है ,,रात जंगल में बिछड़े किसी मवेशी के गले में बधी ये घंटी तो मील भर दूर से सुनाई देती है ..!

मवेशी 'बदरी' से बिछड़ा तो चरवाहा इस आवाज को सुन तक उसको हांक ले जाता है ..पर बाघ भी इस आवाज को खूब पहचानता है और वो भी बिछड़े मवेशी तक जंगल में पहुँच जाता है ..कभी जब शिकार होता था तब शिकारी इस घंटी को ले कर रात मचान में बैठता...मचान के नीचे कुछ दूरी पर पड़वा बांध रखता.. ये जगह वो होती जहाँ से रात को बाघ की संभवित आवाजाही रहती है ! शिकारी मचान से रह-रह कर इस घंटी को बजता..बाघ आदतन इसकी आवाज पहचानता है वो किसी बिछड़े मवेशी की तलाश में उस जगह पहुँच जाता... जहाँ शिकारी रात मचान में चढ़ा होता और जानवर बांध कर इंतजार कर रहा होता, जैसे बाघ बंधे जानवर पर टूट पड़ता शिकारी की गन गरजती और एक बाघ कम हो जाता o,,!

शिकार प्रतिबंधित है.फिर भी बाघ बढ़ नहीं रहे याने साफ है बाघ मारे जातें हैं  ..इस पोस्ट को पढ़ कर आला अफसरान यदि सेंचुरी और टायगर रिजर्व में मवेशियों के गले से घंटी बंधना प्रतिबंधित कर देते हैं  तो शिकार का एक दरवाजा बाद हो जायेगा ,,!  निवेदन बाघ को बचाने में जुटे मेरे मित्र भी इस और प्रयास करें..!]

Thursday, 9 October 2014

एक नवम्बर से पार्क खुलेगा



एक नवंबर से अचानकमार टाइगर रिजर्व सैलानियों के लिए फिर खुल जायेगा,वाइल्ड लाइफ वीक में पेंटिग स्पर्धा में विजयी रहे छह प्रतिभागियों को तब इस पार्क की सैर कराई जाएगी ,, पार्क के फील्ड डायरेक्टर तपेश झा ने वाइल्ड लाइफ वीक के समापन समरोह में शालेय छात्रो को विश्वास दिलाया की पार्क में अगले साल जब वे पालीथीन चुनने आयेंगे तो स्वच्छता मिलेगी..आयोजन बिलासपुर के आईएम्ए हाल में कल शाम हुआ. उन्होंने कहा पार्क में टाइगर की संख्या बढ़ने पर ही उनके और उनकी टीम के कार्यो को सफलता मिलेगी ..!

वन विभाग और नेचर क्लब की सहभगिता में इस अवसर पर वन्यजीवों को फोटो लगाई गई थीं जो स्थानीय शौकिया फोटोग्राफर के वन्यजीवन के जुड़ाव को प्रदर्शित कर रहीं थीं ,,इस अवसर पर पार्क के अधिकारी सी एल अग्रवाल श्री शर्मा, श्री नाथ के अलावा वाइल्ड लाइफ लवर मनसूर खान .प्रथमेश,अनुराग,विवेक जोगलेकर,अमिताभ गौड़,उपेन्द्र दुबे, शैलेश शुक्ला ,शिरीष,उदय श्याम कोरी .और बड़ी संख्या में मीडियामेन तथा वन्य प्राणी सप्ताह को सफल बनाने वाले छात्र-छात्राए उपस्थित थीं ..जिन्हें प्रमाण पत्र वितरित किये गए !एक फोटो मेरी दो इधर-उधर से मिलीं ]

Monday, 29 September 2014

टाइगर रिजर्व से पोलीथीन छात्रों ने बिना



''वन्य प्राणी सप्ताह के पहले छात्रों न अचानकमार टाइगर रिजर्व से गुजरने वाले सड़क के दोनों तरफ से प्लस्टिक,पोलीथीन जैसे पदार्थ बोरी भार भर के चुने..ये सब उने सैलानियों की करतूत जो पार्क में वो कचरा फैंक जाते हैं जिसे खा कर वन्यजीव बेमौत मरने की आशंका रहती है..! पार्क को सैरगाह मान कर सड़क के किनारे शराबखोरी करने वालों की खाली बोतलें और 'चखना' के खाली पैकट भी बड़ी तादात में चुने गए ,,!
करीब पैसठ किलोमीटर लम्बी इस सड़क पर बिलासपुर के प्रतिष्ठित सिद्धि विनायक संसथान, कोटा के डीकेपी केवंची के आदिवासी छात्रावास के 160 छात्र- छात्राएं शामिल हुई,, सबको एक निश्चित दूरी में अलग जत्थे में ये काम करना था. विभाग और नेचर क्लब बिलासपुर द्वारा आयोजित इस आयोजन में छात्रों को वनसम्पदा से परिचय कराया गया..! अचानकमार का रेस्ट हॉउस अब म्यूजियम में तब्दील हो गया है,उसे भी सबने देखा ,,!

कार्यक्रम के अंत में पार्क के अधिकारी सीएल अग्रवाल ने छात्रों को सम्बोधित किया ,उन्होंने छात्रों से अनुभव व सुझाव भी चाहे आयोजन की सफलता में नेचर क्लब के संयोजक मंसूरखान,विवेक जोगलेकर, अक्षय अलकरी,विक्रम दीवान अमिताभ गौड़ ,स्कूल स्टाफ, वन अधिकारी पीके केशर ,रेंज आफिसर नाथ जुटे रहे ..!

Wednesday, 24 September 2014

दिल्ली जू के दुर्दिन

मेनका गाँधी ने केन्द्रीय राज्य मंत्री के रूप में काम कर दिल्ली जू के ऊँचे दर्जे का बना दिया था आज वो सिलसिला होता तो सफ़ेद बाघ में बाड़े में कल गिरे युवक को कदाचित बचाया जा सकता था.
1. फोटो में युवक जिस जगह पर भयभीत बैठा है,और बाघ खड़ा है मेरे को लगता है ये दीवार के बाद खाई है जिसमें पानी होना था.. जिससे बाघ और सैलानी के एक सुरक्षा परत और बनती पर ये बारिश के दिनों फोटो में भी सूखी दिख रही है..!
2.युवक के करीब पन्द्रह मिनट तक नहीं मारा और जू प्रबन्धन उसे बचा न सका,,शायद कोई कारगर इंतजाम भी न थे.. !
बच सकता था युवक अगर ये इंतजाम होते ..!
अ. गन से धमाके किये जाते या धरपटक फटके फोड़े जाते, जो जू कीपर के पास होने थे..
ब. वाटर केनन के बंदोबस्त होता तो उसकी बौछार से बाघ भीगने से बचने भाग जाता, मैंने बिलासपुर के जू में बाघ और बाघिन में लड़ाई में इसका उपयोग देखा है किस तरह दोनों हिंसक लड़ाई बंद कर देते हैं ,,इसकी फिल्म मौजूद है .!
इस हादसे से दो बात साबित हो गयी है. पहला की जू प्रबन्धन की सोच कम,बचाव के इंतजाम कम है और चिड़ियाघर में जन्म रहे सफ़ेद बाघ में शिकार की सहज आदत मरती नहीं,,!
सन 1950 के करीब रीवा के महाराज मार्तण्ड सिंह ने जंगल से पहला सफेद शावक पकड़ा जिसका नाम मोहन दिया गया,जू के सारे सफ़ेद बाघों का वो पूर्वज है .!
मेनका गाँधी जब पर्यावरण राज्य मंत्री थी तब उद्योगों पर सख्ती बरत रही थी इस लाबी ने एक बड़ी लकीर केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री के रूप में खिंचवाई और मेनका गाँधी का कार्य क्षेत्र बस दिल्ली का चिड़िया घर कर दिया गया ,,तब कार्टून में मेनका को चिड़ियाघर के एक पिंजरे में बंद दिखाया गया ..जवाब में मेनका ने कहा-मुझे जो काम दिया गया है बेहतरी से करुँगी और इस जू को दुनिया का में बेहतर जू बना दूंगी ..और उन्होंने इसका कायाकल्प करके दिखाया ..! फोटो नेट की है]

Sunday, 14 September 2014

पानी की बौछार से डरता है बाघ


''भींगी बिल्ली मुहावरा प्रचलित है पर बाघ भी भींगने से डरता है ये बात अलग है की सुंदरवन या रणथम्भौर में बाघ पानी में जा कर शिकार खेलते फिल्माया जाता है,,और गर्मी के दिन वो खुद नहाता है,! बिलासपुर[छतीसगढ़] के जू 'कानन पेंडारी' में वाईट टाइगर की 'मेटिग' पर गजब की फिल्म बनी है ,,!

जिसमें पहले कुछ दिन बाघिन और बाघ को एक जाली के आड़ में परिचय कराया जाता है फिर मिलन के लिए बाद साथ रखा जाता है ..लेकिन बाघ का वर्चस्व बाघिन नहीं स्वीकारती ,,और वो गजब की लड़ाई करती है .. दोनों को कोई चोट न आ जाये इसलिए जू कीपर 'वाटर केनन' से उनपर बौछार करते है..! डंडे से डरते है पर कोई खास असर नहीं होता .. पर पानी की तेज फुहार आते ही लड़ाई बाद ..और गुस्सा कम ..! रुक रुक कर ये लड़ाई चलती है ,,! कभी कभी तो लगता है की नर डर गया,,पर बाद बाघिन एलाऊ कर देती है .

मेंटिंग के पहले शक्ति परिक्षण के लिए हुई गजब की या लड़ाई.. जिसमें पंजे दंत और गुराहट की सुंदर रिकार्डिग की गयी है ,,जिसे दिल मजबूत कर देखा जाना स्वाभाविक है .रह-रह कर हो रही लड़ाई को पानी की बौछार से ही अलग किया जाता रहा है ,,और कोई तरीका कारगर नहीं होता ..बाघ की आँख के ऊपर घाव भी हो जाता हैं ,,छायांकन जू के रेंजर श्री जायसवाल ने किया है ,ये फिल्म अपने में एक धरोहर और वन्यजीवों पर अध्ययन करने वालों के लिए विशेष अहमियत रखती है ..! 

[फोटो नेट की]

Sunday, 31 August 2014

कुतिया माँ का दूध पी का बना शेर



''कौन मानेगा जिसकी माँ शेरनी ने अपने शावक को पैदा होने के बाद दूघ न पिलाया हो और कुतिया माँ के दूध पर पला हो वो बड़ा हो कर जब गरजेगा तो पूरे चिड़ियाघर में दहाड़ गूंजेगी, ये है- बिलासपुर के कानन पेंडारी जू का 'प्रिंस'..करीब पांच साल का है ओर ये शेर दो शावकों का पिता बन चुका है. इसे करीब से देखने में दहशत होती है,,!

इसकी माँ,यमुना और पिता सुलतान को कोरबा जिले में आये किसी सर्कस से यहाँ लाये गए थे, माँ ने पैदा होने के बाद जब शावक को दूध न पिलाया तब उसके लिए अलग कर 'गोल्डन रिटीवर' नस्ल की कुतिया माँ का इंतजाम किया गया,,उसका एक पिल्ला तब प्रिंस से उम्र में बड़ा था,कोई 45 दिनों में प्रिंस खेल में उसे पर भारी पड़ने लगा,अगले एक माह में उसकी ये माँ खेल में उससे थक जाती,,! तब तक ये मांस खाना सीख चुका था और फिर इस माँ को भी अलग कर दिया गया ,,!

प्रिंस आज भी जू कीपर रमेश साहू और सोनू यादव को पहचानता है और उनके दुलार का भूखा है,डिप्टी रेंजर ठा विश्वनाथ सिंह भी उसके बचपन का साथी है जिसे कैज के करीब देख वह दौड़ कर पास चला आता है. उनके सहलाने पर प्रिंस खुश होता है,उन्होंने बताया जब तक प्रिंस अपनी शेरनी से नहीं मिला था उसका बर्ताव हमसे बच्चे के समान था पर अब वो ' मर्द' है ओर बरताव बदल गया है,, वो दबंग हो चुका है ..लोग तो दूर से ही उसे देखते हैं,

[फोटो - उपलब्ध, जू के अधिकारी रेंजर श्रीजायसवाल से जो अच्छे फोटोग्राफर भी हैं]