Sunday, 2 August 2015

सिलिकान वेली मिली


 अचानकमार टाइगर रिजर्व से अमरकंटक की राह बंद करने की तैयारी है, इसके लिए रतनपुर केंदा केवंची या पेंड्रा होते हुए अमरकंटक जाने का रास्ता रहेगा,काफी बन चुका है और घाट का काम 'विलंबित' गति से चल रहा है,पेंड्रा से पहले इस घाट की चट्टानों को काटा गया है और इसके साथ 'सिलिकान वेली' प्रकट हो गई है ,,! 

इस बार बिलासपुर से अमरकंटक जाने के लिए इस रास्ते को चुना था, जब कार इस घाट के कच्चे रस्ते को पार कर रही थी तो नवभारत के पूर्व सम्पादक बजरंग केडिया की नजर चांदी-सोना से मिली चमकती इस पहाड़ी चट्टानों पर पड़ी, बच्चन सिंह ने कार रोकी, और मैंने कुछ फोटो लीं, अमरकंटक के इलाके में बाक्साइट की खान रही है.. और 'अबरक' भी सड़क पर बिखरा हुआ मिलता रहा है.. पर इस निर्माणाधीन राह में तो चमकीली अबरक [सिलिकान] की दूर तक चट्टानें बड़ी मोहक है..! ये चट्टानें किस वजह चमक रही है इसकी अंतिम पुष्टि बाकी है..! 

एक बात और राह तो ठीक बनी है.. पर इस घाट में जिस विलंबित गति दे काम हो रहा है. नहीं लगता की नवम्बर तक ये घाट बन पायेगा और 'अचानकमार टाइगर रिजर्व' की पांच बेरियर वाली राह बंद हो पायेगी ,,!
[फोटो पर क्लिक करके इस बड़े स्वरूप में देखिएगा ..!


Tuesday, 7 July 2015

वनस्पति और जीव एक दूजे के लिए



विश्व में एक दूजे के लिए कुदरत ने जो बनाया है.. उसे समझने एक जीवन छोटा लगने लगा है, कल सुबह अपने फ़ार्म हॉउस गाँव मंगला  में मुझे 'एक दूजे के लिए' की एक नई जोड़ी से परिचय हुआ,,आप देखी, आप के साथ ,,,! कैसे वनस्पति और जीव एक दूसरे के लिए बने है ..

रात रानी रात खिली और सुबह कोई अनजान पतंगा, उसके फूलों का रस चूसने पहुंचा, न वो भौंरा था और न वो तितली, करीब ढाई इंच लम्बा, और एक इंच के पंखों का जोड़ा, छोटे पंख और भारी शरीर कहीं से वो उड़ने के काबिल नहीं.. कम से कम वायुगातिका के नियम से,,पर गजब की उड़न वो इन पंखों से आगे-दांये-बायें नहीं पीछे भी उड़ता और सामने छोटे से अंग से वो रातरानी के फूल के भीतर से कुछ रस लेता जाता,,! कोई आधे घंटे तक वो बिना रुके फूल-फूल तक उड़ता रहा..!

एक मिनट में बीस जगह कम से कम, फूलों तक जाता पंख का कुशल संचालन और गति इंतनी की दिखाई न दे,,कैमरे की गति कम पड़ गई ,,! फिर रंग भी रातरानी के रंग से मिलता जुलता हरा.. फोटो जो ली वो आपके समक्ष हैं, दोस्तों आप में कोई कीट वैज्ञानिक हो या इस खूबसूरत कीट के नाम से परिचित हो तो जरूर बतायें ..!!

Monday, 22 June 2015

गिद्धों को बचना होगा

'ऊँचे आकाश पर उड़ान भरने वाले गिद्धओं को जू के पिंजरे में देख ये आशंका होना स्वाभाविक है कि दुर्लभ्य जीवों का अंतिम आशियाना क्या चिड़ियाघर ही होगा,,कम होते परिंदों को बचाने के लिए अब सभी जिलों में 'जिले का' एक पक्षी घोषित कर उसकी उसका संरक्षण जरूरी है. छ्तीसगढ़ के बिलासपुर के जू कानन पेंडारी में ये गिद्ध खुडिया; और लोरमी" के इलाके से कोई दो साल के दौरान लाये गये हैं, ये मुगेंली जिले में हैं, जहाँ और कुछ गिद्ध बताये जाते हैं ,,!!
लगभग 90 सेमी ऊँचे और मजबूत गिद्ध सफाई कर्मी है ,पर दो दशक में हुए ये दिखाना कम हो गए,बताया जाता है दुधारू मवेशियों को अधिक दूध देने लिए हार्मोन्स के इजेक्शन दिए जाते और फिर इन मवेशिओं के मरने के बाद गिद्ध ने उसे अपनी खुराक बना लेते.. जिस वजह इन हार्मोन्स के बचे असर से गिद्धों के अंडे से बच्चे नहीं निकते,गिद्ध काफी ऊँचे पड़े पर घोंसला बनते है.. अब ऊँचे और मजबूत पेड़ कम हो चले ! आज कम ही लोगो को याद है कि अंतिम बार गिद्ध कब देखा है ,,!!

जू में गिद्ध को चाल और सुन्दरता देखते बनती है,,कुछ दिनों हुए अचानकमार टाइगर रिजर्व का दफ्तर मुंगेली जिले के लोरमी में शुरू हुआ. बाघ और गिद्ध का नाता है, बाघ शिकार खाने के बाद जो बचा छोड़ जाता है वो गिद्धों का भोजन होता है ,,इस तरह उनकी इस सफाई कर्म से जंगल में वन्यजीवों में बीमारी नहीं फैलाती ..
आज वक्त है इस शानदार जटायू को बचाएँ कल फिर वक्त न होगा ,,

Wednesday, 17 June 2015

गोह ने अपने को बचा रखा ..



गोह को बरसों बाद उसी स्थान पर विचरण करते देख आस बंधी की कुछ जीव छिप कर वजूद बनांये है, शहर से लगे मेरे कृषि प्रधान गाँव मंगला में अपने खेत जाते समय गोह [कॉमन इन्डियन मोनिटर लिजार्ड] और कुत्ते को आपस में खेलते देखा ,गोह पूंछ से वार करता और कुत्ता हट जाता.. दोनों किसी को हानि नहीं पहुंचा रहे थे ,, मुझे देख गोह झाड़ी में जा छिपा और कुता बाहर  खड़ा हो गया,..  फिर बरसों खेतों से लगभग कटा रहा लेकिन फोटोग्राफी के शौक ने फिर खेत पहुंचा दिया है..!

दो दिन हुए करीब उन्ही लेंटाना की झाड़ियों के पास मुझे एक गोह दिखा दिया, जब तक वो वापस जाता चार फोटो मिल गए, काफी साल पहले मैंने देखा साबरिया किस तरह गोह का शिकार सब्बल से खोद कर करते है,,एक बार देखा की गोह की पूँछ को उसके गले में बांध कोई शिकारी गोलाकार बनाये लाठी में डाल सात -आठ गोह लिए सड़क से जा रहा था ,,,सुना है कुछ लोग गोह को खाते हैं और चमड़े से चिकारा जैसा कोई वाद्ययंत्र बनाते थे ,,! गोह वन्य जीव अधिनियम में संरक्षित है पर इसकी संख्या में कमी हुई है, ये बात और है की मंगला गाँव में इसने अपने को बचा रखा है ,,!

इस बार गोह की फोटो के दौरान एक बात देखी जिसे शेयर कर रहा हूँ- इसकी चमड़ी में काफी झुर्री होती हैं, जिसका उपयोग ये शरीर का आकार बदलने में बखूबी करता है ,,मुझे ये बैठा दिखा,तब छोटा और मोटा दिखा,,, पर भागे समय ये लम्बा और पतला दिखा ,, शायद इसका उपयोग ये बिल में आने जाने वक्त करता होगा ,,सभी फोटो एक ही एंगल से ली गई है जिसमें भी बात जाहिर होती है ,,,!!

Wednesday, 10 June 2015

मानसून का संदेशा चातक लाया ,

मानसून के पहुंचने में अब देर नहीं ।मानसून का दूत चातक ( Pied crested Cuckoo) जिसे पपीहा कहते हैं पहुंच चुका है। मानसून पहले की बारिश आज शाम बिलासपुर में हुई।
हर साल मई माह के अंतिम सप्ताह में आने वाला चातक आज सुबह 9 जून को मुझे बिलासपुर शहर के करीब गाँव मंगला में मेरे खेतों में पेड़ पर दिखा  और मैंने उसकी फोटो भी ली है ,,

आम तौर पर इसके छतीसगढ़ आगमन के बाद आठ दस दिन में बारिश शुरू हो जाती है। सलीम अली के अनुसार इसका प्रवास अधिकतर द.पू.मानसून पर निर्भर करता है । इसकी एक प्रजाति आफ्रिका से भी आती है । मेरी ये सोच है की मानसून का वेग और बारिश से बचाने ये अपनी यात्रा पूरी कर लेता है और मानसून कब आ रहा है ये उसको सहज  ज्ञान होता है .
पपीहा बादल देख पेड़ से पियू पियू की रट लगता है।इल्ली और छोटे फल इसकी आहार तालिका में शामिल हैं ।
बारिश के लिए उसकी इस रटन पर हिंदी साहित्य में काफी कुछ है।
हरिवंश बच्चन ने लिखा है-
ये वियोगी की लगन है ।
ये पपीहे की रटन है ।
कुछ इसे स्वाति बूंद की आस लिखते हैं।
कोयल के समान ये भी अपने अंडे नहीं सेता । बैब्लर पक्षी जिसे सतबहनी भी समूह में रहने के कारण कहा जाता वे  इसके अंडे सेते हैं । जो इधर काफी हैं. आम तौर  पर चातक नीची उड़ान भरता है पर  बारिश के अंत और शीतकाल में चातक अपनी वंशवृद्धि कर ऊँची उड़ान भरते वापस हो जायेगा।

Monday, 11 May 2015

सफेद गिद्ध परिवार का दूसरा सदस्य मिला,




अब ये तय हो गया है कि छ्तीसगढ़ के कोटा [बिलासपुर] के इलाके में दुर्लभ सफेद गिद्ध [Egyptian Vultuer] अकेला नही, उसके परिवार का एक युवा और भी है ..बर्ड वाचिंग के लिए निकले हमारी टीम को कल ये दूर मैदान में बैठा दिखा, जिसकी फोटो भी ली गयी है, इसकी प्रजाति में युवा का रंग काला होता है और बाद उम्र के साथ वो पीला-सफेद हो जाता है,ये पंछी इस प्रक्रिया में गुजर रहा है ,! लगता है इस परिवार के कुछ सदस्य और भी होंगे ,,!

गिद्ध कम हो गए है,बीते माह एक सफेद गिद्ध की फोटो लेने में सफलता मिली थी,बाद उस इलाके में दो बार आकाश में उड़ते दिखा, कल संडे को जब हम उसके इलाके से गुजर रहे थे,तब जमीन पर बैठा युवा सफेद गिद्ध दिखा.सतर्कता से उसकी फोटो पंछी प्रेमी और जानकार राहुल सिंह,के अलावा श्याम कोरी 'उदय' ,अपूर्व सिसोदिया और मैंने लेने में कामयाबी पाई है.!
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[इस पोस्ट में पहली दो फोटो कल दिखे सफेद गिद्ध की हैं, जो युवा अवस्था में होने के कारण काले पंखों का है,और बाद की दो फोटो, बीते माह में दिखे सफ़ेद गिद्ध की है..]

Thursday, 23 April 2015

ह्रदय परिवर्तन ,शिकारी की हुई औलाद ,



पुनीलाल जाति से शिकारी है और बिलासपुर से सात किलोमीटर दूर गाँव जौकी में रहता है, इस माह जंगल से वापसी के दौरन मैं और श्याम कोरी 'उदय' चिड़ियों की फोटो खींचने उसके घर के पास रुके तब इससे पहचान हो गई और चर्चा में जो कहानी सामने आई अविकल ये है,,

पुनीलाल का विवाह चुका था और वो फन्दे से तीतर-बटेर पकड़ कर शहर में खाने के शौकीनों को बेचा करता था, शिकार को सधे बैल की से फंसाता और पंख तोड़ थैले में रखते जाता,,शादी के ग्यारह साल हो चुके थे. पर कोई औलाद न हुई,आखिर एक दिन कुलदेवी की पूजा करते हुए ये भान हुआ कि चिडियों के प्रति क्रूरता के कारण ही वो ये दुःख झेल रहा है,फिर उसने 'तीतर-बटेर' और दीगर परिंदों को पकड़ना छोड़ दिया.. अगले साल लड़का हो गया,, आज करीब 65 साल की उम्र में तीन लडके और एक लड़की का भरा-पूरा परिवार है जिसमें साथ नाती है,,!

इसमें विवाह कुछ जल्दी हो जाता है,पुनीलाल ने कहा- 'पेट ने नया रोजगार सिखाया' और और छीन्द पत्ते के चटाई-झाडू बनाने,लगा और उसके आंगन में तुलसी का पौधा है और गोदाम छींद की पत्तियों से भरा, किसी वन अधिकारी ने उसे राह दिखाई और मालवाहक ऑटो खरीद लिया जिससे वो छीन्द की पत्तियां बेलगहना से ले कर आता है..!! परिवार के लोग सब चटाई और झाडू बनाते है जिसका बाजार अच्छा है..! उसे परिंदों के प्रवासकाल का ज्ञान है, पर उनको पकड़ने से तीन तौबा की है,,एक टूटा जाल बीते अतीत की याद दिलाते पड़ा था जो फोटो में दिख रहा है..!!