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Friday, 13 May 2016

कैमरा ट्रेक में बच्चे वाली टाइग्रेस दिखी ,




अचानकमार टाइगर रिजर्व में हाल में ही एक टाइग्रेस और उसके दो शावकों की फोटो पेड़ो पर लगाये गए कैमरों ने रिकार्ड की है ,,इन फोटो में कैमरे ने फोटो लिए जाने का समय और तिथि भी दर्ज की है ,,जिसे जीवों की सुरक्षागत कारणों से क्राप कर दिया है,,मुझे ये फोटो टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर तपेश झा के निर्देश पर उपलब्ध हो सकीं,!! उनका कहना है की अचानकमार में करीब डेढ़ दर्जन बाघ है, जबकि ऐसा नहीं लगता,,! वक्त बताएगा हकीकत क्या है ,!
पर इन फोटो ,इसके साथ ये,साबित हो गया है की छतीसगढ़ के बिलासपुर-लोरमी के इस अभयवन में टाइगर परिवार का वन्यजीवों पर राज्य बना है,, श्री तपेश झा अब जगदलपुर में मुख्य वन संरक्षक नियुक्त किये गए है,,उनके स्थान पर आ रहे ओपी यादव पर अब इस टाइगर परिवार और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा का भार रहेगा,,!

Monday, 18 January 2016

वन्यजीव प्रबंधन पर लगा सवाल .

चार दिनों से घायल बाइसन की इलाज के बिना मौत होने की खबर 'नईदुनिया बिलासपुर' के आज के अंक में में वनविभाग के 'असम्वेदनशील' अधिकारियों के रुख की खबर पढ़ कर ये पोस्ट जरूरी लग रहा है, इलाज के लिए कानन पेंडारी जू के डाक्टर चन्दन मौके पर पहुंचे थे पर उनको इलाज के लिए इसे बेहोश करने की अनुमति टाइगर रिजर्व के अधिकारियो ने नही दी थी ,,!! ये बाइसन अचानकमार टाइगर रिजर्व से लगे शिवतराई के जंगल में था और ये इलाका वन विकास निगम के अधीन है,वन्यजीव एक इलाके से दूसरे इलाके विचरण करते है,,! शिवतराई में पार्क देखने आने वाले सैलानियों के लिए आवसीय सुविधा रखी गई ही ,,!
शिवतराई  के इलाके में इस विशाल जीव के पैरों में घाव और बीमारी की खबर पहले छप चुकी थी पर किसी ने उसे बचने कुछ नहीं किया और उसकी मौत के बाद वन विभाग के अफसरों के जो बयान आज नई दुनिया में प्रकशित हैं वो अविकल आपके समक्ष प्रस्तुत हैं- 
1 बाइसन वन विकास निगम के एरिया में था. उपचार के लिए उनको प्रयास करना था,ये उनकी जवाबदारी में शामिल है. केवल निगम ही नहीं, वन मंडल की भी यही जिम्मेदारी थी.
[तपेश झा, डायरेक्टर अचानकमार टाइगर रिजर्व]
2. बाइसन बीमार था, उसे इलाज की आवश्यकता थी. जिसकी सूचना अचानकमार टाइगर रिजर्व प्रबन्धन को दे कर मदद मांगी गई थी,,रविवार को उसकी मौत हो गई...!
[ क्यू खान एसडीओ वन विकासनिगम,]
भगवान मृत बाइसन की आत्मा को शांति और मुझे ज्ञान दे इसकी मौत का जिम्मेदार कौन है!![फोटो फ़ाइल् से है]

Friday, 11 December 2015

हरम की खोज में आये हाथी को उम्रकैद

"ये कहानी उस युवा हाथी की है जो अपने दल से बिछड़ कर मीलों दूर जंगल से गुजरता हुआ अचानकमार टाइगर रिजर्व इस उम्मीद से पहुंचा,कि यहाँ सिहावल सागर में एलिफेंट कैम्प के हथनी को संगनी बना कर हरम स्थापित कर लेगा, लेकिन उत्पाती हाथी घोषित कर उसे बंदी बना लिया गया है और अब ताउम्र कैद की सजा कटेगा।

ये नर हाथी सोलह साल से बीस साल की उम्र का है ।अचानकमार टाइगर रिजर्व छतीसगढ़ के मुंगेली जिले में बिलासपुर से कोई साठ किमी पर है । अभिलेखों के मुताबिक अविभजित मप्र के अंतिम हाथी मातीन से लोरमी तक बारिश में आते थे । पिछली सदी के दूसरे दशक तक इनकी संख्या तीन सौ थी । बाद ये हाथी कम होते गये ।
लेकिन 1992-93 में बिहार और उड़ीसा से हाथी फिर आने लगे । आपरेशन जम्बो" चला कर सरगुजा में कोई एक दर्जन उपद्रवी हथियो को पकड़ा गया ।


इनमें एक सिविलबहादुर अपने हरम के साथ सिहावल सागर में रखा गया ।इसमें हथनी लाली उनकी बेटी पूर्णिमा और बाद इस पकड़ा गया एक नर हाथी शामिल हो गया ।
हाथी उन विशेष तरंगों से बात करते हैं जो हमें सुनाई नहीं देती, पर मीलों दूर तक इसकी ध्वनि जाती है ।हाथियों की पारिवारिक व्यवस्था में इन्ब्रिडिंग" न हो इसलिए दल से युवा हाथी को खदेड़ दिया जाता है । जो बाद ताकतवर बन किसी दूसरे के हरम पर काबिज हो जाता है ।


हाँ तो हमारा ये युवा हाथी मीलों का रास्ता जंगल पहाड़ तय करता हुआ टाइगर रिजर्व पहुंच गया।और उसने अपने मौलिक ज्ञान से यह भी पता लगा लिया कि पालतू हो चुके हाथी कहाँ रहते है। कठिन राह में उसने उत्पात भीं किया। जिस वजह' लाली या 'पूर्णिमा के लिए आया ये हाथी बेहोश कर पकड़ लिया गया।
इस बीच युवा होने से पहले पूर्णिमा की मौत हो गई हैं जिसके कारण को जाँच हो रही है ।पता चला है पूर्णिमा की माँ लाली बीमार और कमजोर चल रही है । 


सैकड़ों किमी का , लम्बा सफर, हरम की खोज बाद इस आशिक की नियति में अब जीवन भर गुलामीलिखी है ।जिसमें उसे साधने के लिए इस हाथी को जटिल दुखद प्रकिया से गुजरना होगा ।
( फोटो- पत्रकार अमित मिश्रा की वाल से साभार)

Tuesday, 2 December 2014

अचानकमार,खुला बेरियर लगा आदेश




अचानकमार टाइगर रिजर्व के मुहाने में बसा शिवतराई जहाँ एक बेरियर खुला है और कोई गार्ड नहीं,याने इस रस्ते बेरोकटोक पार्क में घुसपैठ हो सकती है ..! मैंने रविवार को इस राह से लकड़ी भरा ट्रक इस राह से निकलते देखा जिसमें ऊपर 'जलावन के गठ्ठे रखे थे', फोटो में इस राह में वाहनों के टायर के निशान सड़क पर दिख रहे है ,, ! पता चला मानसून में जब पार्क बंद हुआ तब बेरियर में गार्ड तैनात था फिर पार्क शुरू हुए एक माह हो गया है कोई माई-बाप नहीं है ,,!
जो ट्रक लकड़ी ले कर निकला वो वैध ये या अवैध या पता नहीं पर बेरियर की इस राह से 14 किमी भैंसाघाट होते हुए सिहावल सागर और जलदा ,छपरवा तक जाया जा सकता है..जब बिलासपुर-अमरकंटक सड़क के 'चौरहे' के बेरियार का ये आलम है तो भीतर में यदि कोई बेरियर होगा तो वो क्या इससे अलग होगा ,,!
कुछ ने बताया इस राह पर पहले खाई खोद दी थी पर अब वो भी पाट दी गई है ,! ये इलाका वो है जहाँ वन्यजीव दिखाई देते हैं ,,,! जरा सी लापरवाही उनकी सुरक्षा में सेंध साबित हो सकती है ,,!