तीसरे दिन मेहनत की रंग लॉई और 0rientel Haney- Buzzard को मधुमक्खी के छत्ते से शहद खाते कैमरे में कैद कर लिया गया ( कल का फॉलो अप)
आज सुबह Rahul Singh, Sanjay Sharma, Apurv Sisodia,के साथ बिलासपुर से रवाना हुए और अरपा नदी में सुर्खाब की फोटो लेने के बाद मौके पर पहुंचे।ये जगह थी, बिलासपुर- कोटा सड़क मार्ग में मोहन भाटा के बजरंग केडिया जी का आम का बगीचा, बस फार्म हॉउस के सामने युकिलिप्ट्स के ऊँचे पेड़ पर एक बाज मधुमक्खी का छत्ता खाते मिला ही गया ।ये दुर्लभ मंजर था, इस छते को मघुमक्खी छोड़ कर उड़ चुकीं थी।दूसरा आसमान में ऊपर चक्कर लगा रहा था। हम सबने खूब फोटो ली। यह देखा गया कि बाज, छत्ते के मोम सहित शहद खा रहा था। उसने गले तक बेख़ौफ़ खाया,और विजेता की भांति डाल पर तन कर चलता हल्की उड़ान भर करीब उस डाल के पास जा बैठा, जहां नए छत्ते में, मघुमक्खी बैठी थीं।
मधुमक्खी और छोटे कीट के परागण से जंगल में नई वनसम्पदा का जन्म होता है.पर शहद के लिए दूर-दूर से मकरंद जमा करने वाली,मधुमक्खी के छत्ते जला कर धुआं दे कर परम्परागत तरीके से शहद जमा करने का तरीका गलत है.इसमें बदलाव लाने पर्ल इण्डिया का काम रंग लाने लगा है..
अमरकंटक की घाटी के कई गाँव के आदिवासी अब मित्रवत शहद जमा करने लगे हैं,ये रात पानी की फुहार छत्ते पर करते हैं,जिससे मधुमक्खी आक्रामक नहीं होती और एक तरफ हटाते जाती हैं,फिर संग्रहणकर्ता छत्ते के जिस हिस्से में शहद जमा होता है उसे काट लेते हैं,'पर्ल इण्डिया' के संचालक राजेश तिवारी ने बताया,बचे हिस्से में उनके बच्चे सुरखित रह जाते है..!इस तरह शहद के आलावा छत्ते से वो मोम भी हाथ आता है,जो सौन्दर्यप्रसाधनों में प्रयुक्त होने के कारण काफी महंगा होता है. ये सब मिलाता रहेगा आगे भी बस इस विधि के आपनाने से ..! जगल बचेगा तो हिरण बचेगे और हिरण बचेगा तो बाघ बचेंगे ..!