Sunday, 27 April 2014

टाइगर रिजर्व में रोग फैलाव की आशंका

ये फोटो एक विशालकाय नर बाइसन की है जो खुरहा चपका रोग से पीड़ित लगता है, फोटो तीन दिन पहले 24 अप्रेल को  अचानकमार टाइगर रिजर्व से गुजरने वाली बिलसपुर-अमरकंटक सड़क के गाँव लमनी से पहले दियाबार सड़क के करीब ली गई है..ये नर बाइसन पिछले पैर एक और सामने के के पैर से लड़खड़ा के चल रहा था और मुंह से झाग निकल रहा था[फोटो में भी दिख रहा है] ये लक्षण मवेशी को होने वाले रोग खुरहा-चपका के है..! ये रोग एक मवेशी से दूजे को फैलता है और जानवर की दर्दनाक मौत हो जाती है..! बीमारी की वजह ये कमजोर लगा, क्योंकि पसलियाँ भी दिख रही थीं ..!

वेटनरी विभाग के अनुसार ये fmd डिजीज है और इनदिनों फैली हुई है..बिलासपुर के करीब बसे गौकुल नगर के दुधारू जानवर भी इससे पीड़ित है. घरेलू मवेशियों और जंगल के इन जीवों में एक दूजे जो इस रोग के फैलाव का खतरा बन रहता है..मेरी जानकारी में कोई ढाई दशक पहले शिव तराई और बारीघाट के बीच के जंगल में ये बीमारी फैली थी तब इस इलाके में बड़ी तादात में वन्यजीवों की मौजूदगी था और बाइसन बुरी मौत मर थे ..!#


#[ये उन दिनों की बात है जब शेर दिल अधिकारी एम् आर ठाकरे इस अचानकमार सेंचुरी के इंचार्ज थे और पत्रकार अमित मिश्र,अनिल पाण्डेय सहित मित्रो का दल गाहे-बगाहे जंगल जाता था]

Monday, 21 April 2014

हाथी की गश्त से लकड़ी चोरों के पाँव उखड़े


कभी आतंक का पर्याय रहे हाथी आज जंगल की पहरेदारी कर रहे हैं,सरगुजा में सरहदी प्रान्त से पहुंचकर उत्पात मचाने वाले भीमकाय एक दन्त सिविल बहादुर और लाली को पालतू बना कर अचानकमार टाइगर रिजर्व लाया गया,पूर्णिमा उनकी लाडली बेटी है,जो यहाँ जन्मी है,दल से भटक और महीनों तोड़-फोड़ मचाता दुमकटा दंतैल राजन्दगांव से आखिर मस्ती करते धरा गया. इन सबका ठिकाना अब सिहावल सागर में है, जो मनियारी नदी का उदगाम स्थल है..!

महावत सीताराम,कर्मा, और शिवमोहन तथा दो चारा कातर का ये दस्ता, रोज जंगल की गश्त पर जाताहै, ये इलाका कभी लकड़ी चोरों का स्वर्ग माना जाता था..दो बार टाइगर गिनती के लिए इनसे हमारा टकराव भी हुआ,एक बार इनके हमले से जान बचाने मित्र अर्जुन भोजवानी को गोली भी चलानी पड़ी.. आज इस हाथियों ने इस दशा को बदल दिया है..!

जहाँ लकड़ी चोरी का अंदेशा होता है,गश्त उधर की जाती है,कटाई की आवाज सुनते ही ये दस्ता दबे पांव करीब तक पहुँच जाता है,फिर हाथी के चिंघाड़ से जंगल गूंज उठता है,अब लकड़ी चोरों को सर पर पांव रख कर भागने के आलावा कोई राह नहीं रहती, उनकी साईकिले छूट जाती है,चोरों को करीब अस्सी साइकलों को अब तक जप्त कर मामले बनाये जा चुके हैं..!

Saturday, 19 April 2014

कुल्लू के बचे पेड़ और मेरी यादें



यादें जवान हो जाती हैं कुल्लू के इन सफ़ेद चमकीले पेड़ों को देख कर,अपने औषधीय गुणों के कारण ये पेड़ अब कम ही बचे हैं, बिलासपुर से कोई अस्सी किमी दूर मनियारी नदी के 'खुडिया बांध' में डाक बंगले के परिसर में उगे ये कुछ पेड़ अपना ध्यान खीचने में समर्थ हैं ,इसकी गोंद की तासीर बड़ी ठंडी होती है,बस यही गुण इस प्रजाति के लिए जान लेवा बना है.राह चलता कोई ग्रामीण टंगिए से वार करता और महँगी गोंद लौटते में पा जाता, बाद ये घायल होता ये पेड़ दम तोड़ देता.. अब अमरकंटक की घाटी में ये पेड़ कम बचे हैं.वो भी दुर्गम इलाके में जहाँ मानव की आवाजाही कम है,

अंग्रेज इसके चमकीले पेड़ को 'लेडी लेग' भी कहते,जब इस डाक बंगले आता हूँ कुछ यादें जवान हो जाती हैं, कैसे इस के जंगल में बरसों पहले सिन्हा साहब ने जान पर खेल मवेशीमार बाघनी को मारा था,चन्देली वाले लाल साहब के साथ मीलों लम्बा प्रवासी बत्तखों का काफिला उड़ाते देखा था,शेर दिल वन अधिकारी एम्.आर ठाकरे साथ तेंदुए के शावकों के साथ मैंने फोटो ली और फिर अगले दिन माँ उनको उठा ले गई, बायसन का बिछड़ा बच्चा चरई के लिए जंगल गई गायों के साथ गाँव में आ गया और रहने लगा,फिर माँ उसे खोज कर आ पहुंची और रोज दूध पिलाने आती.. बाद वो शावक मर गया ..!उसे करीडोंगरी रेस्टहॉउस में रखा गया था.


इन सबके साक्षी ये कुल्लू के पेड़ भी हैं,डाकबंगले के करीब होने से सबकी निगाह में हैं और ये जीवित बचे रहे. पर जंगल में कम ही बचे हैं. सरकार को इस गुणकारी पेड़ को बढ़ाने में कोई प्रोजेक्ट हाथ में लेने की जरूरत है,देर हो चुकी है सरकार और देर न करे ..!

Thursday, 17 April 2014

पलाश का जीवन संघर्ष


''जीने की इच्छा से रौशनी के लिए पलाश [टेसू]के पेड़ का लता हो जाना है या फिर ये टेसू की कोई प्रजाति, पर मैंने ये कान्हा और अचानकमार टायगर रिजर्व में इस देखा,इसके फूल कुछ बड़े और टेसू के फूल वसंत के बाद  तक खिले हैं,जबकि सामान्य टेसू के फूल झर चुके हैं. संभवत ये जीवन के लिए टेसू के पेड़ का साल के ऊँचे पेड़ों के बीच रूपांतरण हो जाना लगता है..जो भी हो..पर पेड़ों से लिपटी लता जंगल की शोभा बढ़ती है..!!

जंगल बचाना है,तो मधुमक्खी बचाओ




मधुमक्खी और छोटे कीट के परागण से जंगल में नई वनसम्पदा का जन्म होता है.पर शहद के लिए दूर-दूर से मकरंद जमा करने वाली,मधुमक्खी के छत्ते जला कर धुआं दे कर परम्परागत तरीके से शहद जमा करने का तरीका गलत है.इसमें बदलाव लाने पर्ल इण्डिया का काम रंग लाने लगा है..
अमरकंटक की घाटी के कई गाँव के आदिवासी अब मित्रवत शहद जमा करने लगे हैं,ये रात पानी की फुहार छत्ते पर करते हैं,जिससे मधुमक्खी आक्रामक नहीं होती और एक तरफ हटाते जाती हैं,फिर संग्रहणकर्ता छत्ते के जिस हिस्से में शहद जमा होता है उसे काट लेते हैं,'पर्ल इण्डिया' के संचालक राजेश तिवारी ने बताया,बचे हिस्से में उनके बच्चे सुरखित रह जाते है..!इस तरह शहद के आलावा छत्ते से वो मोम भी हाथ आता है,जो सौन्दर्यप्रसाधनों में प्रयुक्त होने के कारण काफी महंगा होता है. ये सब मिलाता रहेगा आगे भी बस इस विधि के आपनाने से ..! जगल बचेगा तो हिरण बचेगे और हिरण बचेगा तो बाघ बचेंगे ..!

Wednesday, 15 January 2014

चिड़ियाघर में 21 चीतल की मौत .




छतीसगढ़ के बिलासपुर में कानन पेंडारी के चिड़ियाघर में आज बाड़े में 21चीतल मरे मिले,एक ही रात में इतने चीतल में मौत का रहस्य अभी बझा नहीं जा सका है,मारने वाली सभी मादा हैं और उनके शावक है,जबकि सभी नर सुरक्षित हैं.! इस बाड़े की शेष 15 मादा और 18 नर चीतल को साथ के बाड़े में कर दिया गया है. 

कानन पेंडारी बिलासपुर से कोई नौ किमी दूर है और यहाँ बाघ,शेर,हिप्पो,सहित 55 प्रजातियों के वन्यजीव रखे गए है,.डीएफओ हेमंत पाण्डेय ने बताया की मौत के कारणों का पता लगाने विशेषज्ञों की टीम बना दी गई है. बताया गया है की रात 'दाना' दिया गया था, तब सब कुछ सामान्य था. आज सुबह रूटीन में जब कर्मचारी बाड़े में गया तो उसने देखा और अधिकारियों को खबर दी. ये बाड़ा कोई चार हैक्टेयर का है.

मौके पर ये पाया गया की जहाँ मादा चीतल ने दमतोड़ा है वहां,उनके मुँह से खून गिरा है.ऐसा समझा जा रहा है की संध्या जो दाना दिया गया वो कुछ विषाक्त रहा होगा जिसका असर छौनों और नर से कमजोर मादा चीतल पर पड़ा होगा.वैसे भी 'कैटल फीड' में यूरिया को मिलाना आम है और इसकी अधिक मात्रा जहर बन सकती है. फ़िलहाल ये विवेचना का विषय है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ये वस्तुगत स्थिति जाहिर होगी.

कुछ मादा चीतल का पेट फाड़ा गया है जो रात में किसी मुर्दाखोर जीव की करामत लगती है.यदि ये सुबह हुआ है तो चिड़ियाघर प्रबन्धन के बेहद लापरवाही की मिसाल होगी . यहाँ से अधिक बढ़ने पर चीतलो को अचानकमार टाइगर रिजर्व में समय समय पर छोड़ा जाता रहा है..!तब भी कुछ चीतल के मरने की जानकरी मिलती रही..पर इस बड़ी तादात में मौत का कारण अभी साफ नहीं है..!

यदि इस पोस्ट को कोई जानकार पढ़े या आपके इलाके के किसी चिड़ियाघर में ऐसा कोई मामला हुआ हो और उसके कारण पता हो तो जरूर लिखे ताकि इस गुत्थी को सुलझने में मदद मिले ..!


फालोअप -
प्रारम्भिक जाँच बाद ये माना जा रहा है की ये मौतें एन्थ्रेस' के कारण हुई हैं,चिड़ियाघर को एक हफ्ते के लिए बंद कर दिया गया है- तीन सदस्यों की विवेचना कमेटी दो दिनों में अपनी रिपोर्ट देगी ..!

कुछ सवाल जो अनुतरित हैं -
1. एन्थ्रेस, मादा और शावको पर ही कहर क्यों बना.
2.फोटो में दिख रहा पेट के हिस्से को किसी ने खाया है ये किस की करतूत है.
3.क्या इस बीमारी से बारह घंटे में इनती मौत हो जाती है और बाकी प्रभावित भी न हो.
4 पहले किसी चिड़ियाघर में क्या इस तरह का हादसा हुआ है ..!
विश्वास है जाँच प्रतिवेदन  में इन शंकाओ का समाधान होगा ..!
फालोअप --
[बरेली स्थित इंडियन वेटनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट ने पुष्टि एक पखवाड़े बाद ये पुष्टि का दी है की ये मौते एंथ्रेक्स से नहीं सवाल अनुतरित है की आखिर ये मौत का क्या कारण है. अब जाच के बिंदु हैं .. बाड़े में क्या को कुत्ता या कोई जानवर घुसा था जिसकी वजह भगदड़ में जो कमजोर थे वो मारे गए अथवा  चीतलो के दाना-पानी कुछ विषक्त था जिसका असर कमजोर जीवों पर पड़ा और वो मारे गए,मजबूत बचे रहे }

Wednesday, 1 January 2014

अचानकमार टाइगर रिजर्व में 'झाड़ू जिंदाबाद' ..




छतीसगढ़ के इस टाइगर रिजर्व के ह्रदय में बसे वन्यगाँव छपरवा में छात्र-छात्राओं ने स्कूल के आसपास झाड़ू लगाकर सफाई की, फिर शाला में झाड़ू को धन मानते हुए शपथ ली .आयोजन से सूत्रधार दिल्ली विवि के रिटायर्ड प्रो. पीडी खैरा थे..!

प्रो. खैरा, अचानकमार में आदिवासियों के उत्थान के लिए कोई ढाई दशक से लमनी में रहते हैं और वहां से छपरवा में इस स्कूल में छात्रो को मानसेवा में पढ़ते हैं. आयोजन में छात्रों ने ये भी शपथ ली कि, छपरवा में लगाने वाले साप्ताहिक बाजार को वो गोद लेंगे और वहां स्वच्छता बनाये रखेंगे ..!

नए साल के प्रथम दिवस आयोजित इस कार्यक्रम में सामूहिक भोज का भी आयोजन किया गया था.जिसे छात्राओं ने तैयार किया..! यद्यपि आयोजन को गैर राजनीतिक कहा जायेगा.पर ये उतना नहीं लगा, वन्य अंचल की ये पीढ़ी जानती है कि. झाड़ू आम पार्टी का चुनाव चिन्ह है और अरविन्द केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री हाल में बने हैं ..!

छतीसगढ़ के इस टाइगर रिजर्व के ह्रदय में बसे वन्यगाँव छपरवा में छात्र-छात्राओं ने स्कूल के आसपास झाड़ू लगाकर सफाई की, फिर शाला में झाड़ू को धन मानते हुए शपथ ली .आयोजन से सूत्रधार दिल्ली विवि के रिटायर्ड प्रो. पीडी खैरा थे..!